दई चैन मोल पाई
दई चैन मोल पाई प्रेम रतन।
पल पल अनल बिरह अरी जलनौ,तई करै शीतल उर एक दिखन।
नैन मनौ रहियौ चहै भरै जलतै,खिलि रहै अधरन देखि उन मुस्कन।
बोलि बैन सैन जग सब बिसरै,जई बारि पुकारि लैवे एक प्राणन।
सुहंगौ नाय महंगौ "प्यारी" प्रेम सौदो,कहू सब कोई करियौ प्रेम रमण।
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