रमण मोहे लो चालो

रमण मौहे लै चालौ वा नगरी।
जँहा सरबस तुम मेरे अपने,जँहा रहू बनिकै तुम्हारी सगरी।
देखन सुनन मनन जँहा तुम्हीं,श्वास जँहा नाम तुम्हारौ जप-री।
मौपे जोर नाय जँहा दूजैकौ,झूठेई नाय कहि-सकै कोई अपनी।
"प्यारी" बसा लेओ सोई देसवा,लागै ना जँहा जीवन बोझ गठरी।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया