बीनत कुसुम किशोरी
बीनत कुसुम किशोरी उपवन।
चुन भारत पट पिय की झोरी , सहज कबहु उचक लगी चुनन।
अति ऊचै कर उचकि ना जावै,ऐकौ कुसुम अंक भरि चुनवाए।
सुधि बिसारि पिय नीकौ ना लावै,प्यारी अंक पिय भरि अकुलाए।
तऊ सिंधु तरंग उठि प्रेम ऐसी, पट लज्जा प्यारी सब बिसराई।
दोउ कर हार पिय उर डारै , " प्यारी" पिय प्रेम सुधा बरसाई।
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