आजु ब्रज आनन्द छायो है
आजु ब्रज आनंद छाया है।
घर घर मंगल गान बधाई,जशोमति लाला जाया है।
साँवल रूप नैन कछु मोटै,देखतोई उर लुभाया है।
मुस्कनि ऐसौ मनौ खिलौ कुमुदल,लोभहु देखि ललचाया है।
वारि प्राण मान मन मोहन,दिढौना चिबुक लगाया है।
चलौ सखी चलौ बधाई दैवन,"प्यारी" मन मनरथ पाया है।
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