उलाहनों

उलाहनौ

भौरिहु उलाहनौ लाई गुजरिया।
करत बैन मैय्या सौ,नैन घुमात महल भरहौ।
तबहु उठि आवतौ,दुई नैन मलतौ साँवरौ।
जम्हात मुख खौलिहै,नयन ढुरै अलस भार सौ।
खुलिहै बिखरिहै अलकै,सौहत झीनी काछिनि एकौ।
सर्ब रूप नयन भरिहै,नाहि आभूषण धारहौ।
ता पै दुई बाह खौरिहै,बुलावतौ प्यारौ मातु लौ।
तुतली बाणी कहिए कैसौ,अली!मैय्या मौली आवतौ।
लौ कौन कैसौ उलाहनौ किसकौ,गोपी बिसरिहै सबै बात कौ।
अहो!ऐसौ तुतलौ बैन कबहु,सुनत जग्यौ मौरै भाग हौ।

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