थामे न थमे
थामै न थमै
रस बाँवरे थामै न थमे।
रसहु भरिहै सुधि बिसरावै,गिरत पद चाप जहाँ तहाँ।
दुई प्रेमालिंगन अड बंधिहै,जानै न प्रियै प्रितम कहाँ।
चलै सम्हारिहै अंग बसन भूषण,आली मतवारै सम्हारती।
पद पद कोऊ पराग पदम,बढ बढ जायै बिखारती।
ढुरत पडै कबहु ऐसौ,कर थाम सखिन बढिहै।
ऐसेहु रंगै परस्पर दुईन,प्यारी निरखे या सम्हारिहै।
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