उपवन परै दोऊ कुसुमनी बीच

उपवन परै दोउ कुसुमनि बीच।
भुज मैले भुज लिपटै ऐसे,कुसुमनि रहै परे नैननि मीच।
पीत बरण सरसो से बसना,प्यारी खिली कुसुमनि बीच परी।
उपरि बसन ना कोउ पहिरै,ओढत पिय रहे प्यारी सरी।
अतिही कृपा "प्यारी" जानत जोरि,तऊ नितही छबी दरस करी।

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