नैना काढि धरूँ

नैना काढि धरू
नैना काढि धरू कागा।
अईयौ क्षुधा मिटईयौ अपनौ,खइयौ देहि को माँस।
नैना धरियौ काढि म्हारौ जी,पिया आवन कौ आस।
नैनन नै जबै पिय निहारै,तब सौ भयै अनमोल।
बिन मौल कौ दासी भयै हम,छूवै कर दियौ हमु अमोल।
नैना धरिऔ ऐसौ जगह,जहाँ गुजरै नंद कुँवर।
प्यारी उहा ही बिछि रहिए,जहा पुष्प पै नंद भ्रमर।

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