सुरति हित अनुपम सेज रचाई
सुरति हित अनुपम सेज रचाई।
श्वेत वृहत आकार की हंसा,तराशी मणि मानौ दीन्ही बनाई।
काट छाँट शशि करिकै चौकोरा,पंखनि बीच दीन्ही चादर बिछाई।
पग धरै सिराहनै दोउ प्यारै,आपस कर भाँति सिराहनै लगाई।
सहज कदि व्याकुल कदि होवै,"प्यारी" जोरि एक हौवतो चाही।
Comments
Post a Comment