भाँति कौन को तोड़ियो मौन

भाँति कौन तौ तोडियौ मौन।
सबई जतन करि देखि गिरधर,तबई एक नाय रहै ह्यौ दौन।
बहु बेरि हारि तऊ नाय हारि,आस जुरि नाय सकिहै तोर।
अबहु अति भई सहि ना जावै,नाहि सहि जावै एक दिना होर।
मूक भए काय नेक बतावौ,"प्यारी" बतावौ च्यौ जइयौ छोर।

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