नैनन ही घनश्याम

नैनन ही घनश्याम
आय जइहौ नैनन ही घनश्याम।
रूप अनूप सुधा बिखराते,मोर पखा शीश लगाते।
कुंडल मकरै कपोल हिरातै,अधर गुलाब मंद मुस्काते।
काजल नैनन कटार सजातै,लटकनि कपोल लट लटकाते।
टेढी कटि कटीली सजाते,बंशी लै करहु बजाते।
पीताबंर पीत पटा फहराते,नुपुर पगा रून झुनन बजाते।
बस्यौ हिय प्यारी राधा के,मनौति बेरि बेरि प्यारी मनाते।

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