म्हारा पलकनि लागै नाहि रमण बिना।

म्हारा पलकनि लागै नाहि रमण बिना।
आधी रैन जाय बैठू अटारी,कहू चंदा तारा सौ मोहै रमण मिला।
जग सौवे ह्यौ रौवू बैठी इकली,कारे नभ सौ पूछू कदसि आवै पिया।
बात पौरानी उन हाँसू आपई,याद जावन की आवै रौवे म्हारा जिया।
रमण बिनु सूनै नैनन प्राणन,"प्यारी" जीवन सूनौ दरशन रमण बिना।

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