अतिहि कारौ
अतिही कारौ तऊ मतवारौ,अरी राधारमण म्हारौ प्यारौ।
नैनन मोटै तीखै खोटै,उर दै चोटै गडि कै गारौ(गाढ़)।
अधरनि मुस्कन गरदनि लटकन,आछौ-आछौ देखि बारौ(बावरा)।
अति सुघर कमर पायन झनकर, बलिहार परि "प्यारी" प्यारौ।
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...बलिहार परि "प्यारी" प्यारौ।।।।
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