क्यों कोई न राह है
क्यू कोई ना राह है???
नजर मंजिल न रस्ता चाह है....
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कुछ बर्फ सी अहसास-ऐ-जमीं
क्या मुझमे न बाकी जां है????
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इक भीड सी चारो तरफ
मगर क्या कोई हमनवां है???
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अब आज कल परसौ या फिर
क्या गुंजाइश-ऐ-तब्दिलियां है????
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किसी गर्त मे गिरते समय की
क्या बनी कोई थाह है????
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कहने से सुनने से हो क्या
"प्यारी" टीस किस्से अथाह है????
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