मुख सौ करे पौन लली।

मुख सौ करे पौन लली।
श्रम कण केलि झलकत देखि,सहेजनि सुवास श्वास सौ चली।
निज भूली श्रम स्वेदा मुखकै,बुहारे पिय पटसौ स्वेदा भली।
"प्यारी"अचरज यह देखि भारी,भ्रमर सेवै आज आप कली।

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