दोउ निरखि निरखि सुख पावै।

दोउ निरखि निरखि सुख पावै।
मिलै दोउ चंद्र चकोर पिय प्यारी,सैनन ही बतियावै।
अधर सुरस खिलै पंकज हित सौ,मुस्कनि टौना मारै।
कहन सुनन कहो किस विधि जाए,रंग सदन जो निकसै आरै।
"प्यारी" बात यह कहन की नाही,गुड गूंगे को पारै।

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