मौर मन उन दोष
मौर मन उन दोष ना धरिहै,प्रीत रीत चली योई सदाई।
मूरत बसा उर जिन करि पूजा,तिन लगै नाय पलहु भुलाई।
जिन सरबस जानि तजि दई सबहु,उन्हु तजै ह्यौ-ता कहा बुराई।
बिनु बिरहा जानौ प्रेम ना होय,बिछोह मिलै अति मिलन छनाई।
उन करि दई तऊ बात नवी-ना,उन्हु "प्यारी" चली रीत निभाई।
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