मन अंधियारा नही द्वीप मिटाए
मन अँधियारा नाही द्वीप मिटाय।
जग चकाचौंध सौ नैननि दुखै,जबसौ झलक छनहु उन पाय।
नाम लए बिनु जिवरौ दुखै,जगकी अतिशबाजी हमे ना सुहाय।
हौवे दीवारी उन यादहु हौवे,याद बिनु तीज त्यौहारहु ना आय।
"प्यारी" समझावै मन नितही बैठी,नाम द्वीप रमणा उर लै जलाय।
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