ऐसा भी तो मुमकिन नही

ऐसा भी तो...मुमकिन नही....
,
जिक्र तेरा हो निगाहे नम ना हो
इश्क हो मगर आशिक-ऐ-गम ना हो
ऐसा भी तो...मुमकिन नही....
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खुश्क हो तलब मगर प्यास न हो
हो न जिंदा मगर लाश न हो
ऐसा भी तो...मुमकिन नही....
,
है जलता चराग रोशनी ही नही
ख्वाब देखे क्या निगाहो से कभी
ऐसा भी तो...मुमकिन नही....
,
लफ्ज तो हो तुम मगर जज्ब नही
उठती हो कसक बनै नज्म नही
ऐसा भी तो...मुमकिन नही....
,
आतिश-ऐ-दिल की दीवाली न जली
रंग-ऐ-हमदम सी होली न मनी
ऐसा भी तो...मुमकिन नही....
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आखिरी मुकाम आशिको का कभी
"प्यारी" पन्नो मे चंद क्या है कही
ऐसा भी तो...मुमकिन नही....
,
ऐसा भी तो...मुमकिन नही....

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