मोहे कारौ रँग प्यारौ
मौहे कारौ रंग प्यारौ रमणा कौ।
जग कौ रंग झूठौ उडि गयौ मौ-तै,चढि गयौ श्याम रंग सजना कौ।
चढ्यौ जबतै रंग दूजौ ना भावै, चाह दूजौ रंग नाय देखना ह्यौ।
दिवस ना भावै भावै रैन ह्यौ अंधेरी,भावै ना भानु तारे चंदना मौ।
दीखै ना कारौ तो चाहू ना नैनन,"प्यारी" चहै नैन मिलै तकना तौ।
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