पीर प्रीत सखी जानियौ

दोहा --- पीर प्रीत सखी जानियौ,दौऊ संग संग रहै सदाई।
पाछै प्रीत पीर पहलौई,प्रेम पथ योई जानौ तौ आई।

सखी उल्टी प्रेम जग रीती।
पीर लगै यामै सबसौ प्यारी,खौई सौचिकै हौवै उर भीती।
अरी मिलन बिरह तरपावै दौनोई,कहू कैसौ सखी उर बीती।
काज करै नाहि समझ समझावन,आवै समुझ नाहि कौऊ नीती।
सौचू कछु करू हौवै कछुई,"प्यारी"हौवे भरी कदि रीती।

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