रसिकन प्राण
रसिकन प्राण
रसिकन प्राण राधा।
रट प्यारी को नाम,भज सवेरे साँझ ही।
श्वास श्वास टेरत रहिहै,बिनु नाम ना आवे श्वास कोई।
कुंजन कुंजन राधा टेरिहै,लैहि नाम नैन बहावतौ री।
सोहणी देत रहिहै महलन,टहल महल नित नाम जी।
प्यारी भज लाडली नाम,धुनि लगा प्यारी नाम की।
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