गौर श्याम भज
गौर श्याम भज
गौर श्याम भजहु मनवा मौरे।
एकौ राधिका संग मे सौहै,एकौ आपहु श्यामा हौहै।
एेकौ पगा सिर शौभित न्यारी,ऐकौ मुंडा सिर शिखा छुटारि।
मुस्कनि एक मारिहै टौना,एकहु नैन बहवतौ रौना।
राधे कहत एक हर्षावै,हरे कृष्णा एकहु भावै।
मानिहै नाही दुई एक जानिहै,गौर श्याम नाहि भेद मानिहै।
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