वासन्ती रँग खिल गयो
वासंति रंग खिलि गयौ चंहु ओरि।
लता तरू अरू फूलन कुंजन,पल्लव खिलै नव-नव अंजु कोरि।
कोकिल कीर मोर दादुर पपिहा,बोलत भाँति-भाँति मृदु सब बोरि।
हाँसि हाँस सखी सैनन बैनन, चुटकी चाटु चलि रहृयौ कुंज खोरि।
लाली लाल चढ्यौ रंग रंगिलौ,सोई रंग चढ्यौ सखी "प्यारी" को-रि।
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