ए काश कभी तो कहना आये

ऐ काश ! कभी तो कहना आए.....
की ढलती है कैसे तुम बिन ये शामे,की कैसे न कभी कोई सवेरा ही आए।
ऐ काश ! कभी तो कहना आए.....
की कैसे पता न मिलता है तेरा,की कैसे न तेरा कोई पता ही  बताए।
ऐ काश ! कभी तो कहना आए.....
की कैसे है कहने को हजार बाते,मगर देख तुमको न कुछ कही जाए।
ऐ काश ! कभी तो कहना आए.....
की कैसे है भीतर कोई नाचता सा,की कैसे है बाहर कोई रोक जाए।
ऐ काश ! कभी तो कहना आए.....
की कैसे हूं तुम बिन चली जा रही मै,की कैसे हो तुम हर कदम साथ आए।
ऐ काश ! कभी तो कहना आए.....
की कैसे हो मुझ पर कभी रीझतै से,की कैसे कई बार तुमको रिझाए।
ऐ काश ! कभी तो कहना आए.....
की कैसे कही आज तक सब तुम्ही से,पर ऐसै की जैसै कभी न बताए।
ऐ काश ! कभी तो कहना आए.....
की कैसे सरल बांवरी सी मुझे तुम,अपनी दिल-ओ-जान "प्यारी" बनाए।
ऐ काश ! कभी तो कहना आए.....
मगर कह सके कब और कब कह सकेगे,है लगता कही उम्र न यूं ही गवांए।
ऐ काश ! कभी तो कहना आए.....

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