सखी! जानौ प्रेम नासूर कौ फौरा।

सखी! जानौ प्रेम नासूर कौ फौरा।
पकै नाहि पूरौ फूटिहै ना कबहु,रीसै धीरे-धीरे रस थोरा-थोरा।
बैद्य ना कोऊ औषध ना लगिहै,हौवे नाय रीता करो जतन भतेरा।
चीस चबक अति कम होयि रहवै,नाय होवे तो लगे सब कछु कौरा।
"प्यारी" दरद रसिलौ रस फोरे को,जग खौदे ज्योई त्योई बाढै रस मोरा।

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