लगा लयी उर रमणा मोहे

लगा लई उर रमणा मौहे।
झुकाए बरौनि ठाडी निकट ही,पिय रही कौर नैननि जौहे।
अनूप सिंगारि धारि अद्भुद पी,गुलाबी हरी माला गल सौहे।
उठाई बामई भुज प्यारौ जी,करि लई भुज नीचै मौहे।
लगी प्यारी उर अति "प्यारी",बाढि शोभा उर लागै तै तौहे।

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