प्रीति डोर मोरी काची निकरी
प्रीति डोर मोरि काची निकरी।
टूटि गई जग झटक नेक तै,भई कही सुनी सब छिछरी।
जग जीता इन जीती बतिया,हारी भाँति ह्यौ जन्म पिछरी।
प्रेम बिछोह मिलन पीर भूली,जानै कैसो बात सब बिसरी।
हां रमणा तऊ तौहे बिसारिकै,"प्यारी" जीवन च्यौ डोर जुडरी।
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