गऊ चारण
गउ चारण
गउ चारण चलौ कन्हाई पहलौ पहल।
इतनोई लाला इतनोई बछडा,अरू इतनोई बछिया सारी।
कोउ कारो भूरौ कोउ गोरो,अरू कोउ चित्तिदारी।
टेरत हाँकत बंशी बजावत,सखी देखत चढी अटारी।
सुबल श्रीदामा मधुमंगल सखा,चलिहै लेत लकुटी लटा री।
काँधे कामर कारी धरिहै,लिए कांधै झौरी भोजन वारी।
उडत रेणु अंग अंग लिपटिहै,रचिहै धूरि धूसर लला री।
लटक मटक पग धरे साँवरौ,प्यारी मटकन जयि बलिहारी।
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