राम राम रसना रटै,रटै रोम सकल प्रति स्वास।
सदा दिवस जीवन रहै,हौवे गहन रैन कौ नास।
जाकै उर रमतै रहै,राम अरु राम को नाम।
आवै निकट नाही ताईकै,जग,लोभ,मोह अरु काम।
जा नै कदिहु राम कह्यौ,ताकौ पावन जानियो गात।
सोई जग फसिकै भी रहै,जल तेल बूंद की भाँत।
राम नाम दोऊ नाय है,ऐको नाम,राम ,राम,नाम।
सार बात जे जानिकै,"प्यारी" लगा लाग नाम राम।
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