श्री राधारमण निरख प्रिया
श्री राधारमण निरख प्रिया हाँसै।
नैननि मीन ज्यू देखि जलधि,डूबत तरत करत क्रीडा प्यासै।
झूकत थिर दोउ भए बाबरै,लखत लगत दरस प्रथमा -सै।
खिलत कुमुद जई देखि रविही,चातक ज्योई सुवाति हौ आसै।
सुईकौ नाकै ज्यू गजही निकारै,"पिय प्यारी" त्योई ना कहनन आतै।
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