चाह चाही होवै तिहारी
चाह चाही होवै तिहारी,ऐ जी गिरधारी।
मति मंद मोरि आछी काची जानू ना,चलूं तोरे उरहु पिछारी,ऐ जी गिरधारी।
जग भरमा लए मोहै पल पल-हु,उर डोर तोहै पकडारी,ऐ जी गिरधारी।
करि करि देखि मन मौरि अब लौ,अब थमिकै तोहै पुकारी,ऐ जी गिरधारी।
समुझ आवै नाय तऊ "प्यारी" कहवै,किजौ मनहु एक विचारी,ऐ जी गिरधारी।
......
......ऐ जी....... गिरधारी।
...... गिरधारी
........ गिरधारी.........
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