कहू कहा रंग महल की बात।
कहू कहा रंग महल की बात।
भरी भीर सखियन की भारी,नगर के नगर बसै हो ज्यो साथ।
कतार द्वार भई अनगिन दूरि,आखिर मे पथ देखि वाटिका कौ जात।
कनक खंभ खडै भाँति ऐहि,खडे ज्योई मटुकी पै मटुकी माट।
राजित जोरि उपवन मे देखि,"प्यारी"देखि हसतौ रंगिलौ बतियात।
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