प्यारी की विनती

(देह विवाह के समय प्यारी सखी की अपने पिता से विनती)
...
बाबा म्हानै ब्याहबौ नाय दूजै।
जानत पहलोई बींद मोरै रमणा,तैनेहु तौ चरणनि याकै पूजै।
करि सकू नाय निबाह ओर संग,बात साँची मोरि मान लीजै।
पग फैरन आई अब दो लौटाय,प्राणन नाही तन सौ विलग कीजै।
बढिकै उनसौ ना उन सम चाहू,मौहेहु तो उन्ही सौप दीजै।
दईकै कर उन कर मौर बाबा,माँग टीकौ "प्यारी" अमर कीजै।

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