सुधा सिन्धु लली लाल
सुधासिन्धु लली लाल हंसा पगै।
अगाध अनंत सुधा लली रसकी,जामै डूबतई पिय नित व्याकुल रहै।
सुधा विशेष बात रस कुँवरि कै,ज्योई-ज्योई काढौ पीवौ त्योई बढै।
लुंठित याई कुंठित पिय तबई,गाढि ओरि प्यास उर पीबत जगै।
बात नवी नाय तऊ नित नवई,रसिकन कही "प्यारी" पुनिही कहै।
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