झीने झरोखे

झीनै झरोखे झकै किशोर किशोरी।
भानु उदित नभ बाल रूप कौ,चहि चहि चटकानि जोरहु बोरि।
सेज प्रेम पौढे रस एक रसीलै,रसहु भयौ जिनसौ हु रसो- री।
आनंद भरि देखि हस बतियावै,"प्यारी" सखिन संग देखिहु जोरि।

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