हिय बसों

हिस बसे
थारी सूरत म्हारा हिवरा बसी,मिलाय नैन देख लेवती।
कैसो बाकौ सजीली छब साजी,मोर मुकुट कटि काछिनी काछी।
पिताबंर झुगला अरू टोपी पहिरै,खिलत देखिहै अंग अंग बाछी।
दूरि कितनोई दूर तुव होवती,पल छिन नैन मिलाय मिलौ आछी।
नैन किवडिया करिके बंद मिलू,छाडू जगत कौ देखन साँची।
चरण रति पिय प्यारी पावै,पोथी प्रेम को लेउ बाँची।

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