कोउ,लै जावौ रमण जु पास।
कोउ,लै जावौ रमण जु पास।
कोउ तो सुनि लौ पीर दुखियारी की,दीजौ काढि करेजे लगी फाँस।
बसै दूरि देस पिय पाम मौरे बेडी,कोउ दीखै ना जासौ करू आस।
बिनु उन निकरै ना प्राण भी मोरे,भई बैरन आनि जानि श्वास।
चहु ओरि सौ बैरि घिरी प्यारी,भेजू कैसो संदेसौ उन पास।
बनी सहाय आवौ बेगि पी रमण जु,"प्यारी" सकल पीर किजौ नास।
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