जई लजा आनन

जई लजा आनन प्यारी लई झुकाई।
पिय हिय अति मोद‌ बाढि गयौ,पकरि चिबुक पिय लाड़ सौ उठाई।
रोम पुलक जई अलक ढलकि गयी,सहज पकरि लाल मुख दी हटाई।
लोभ बढ्यौ ओरि छूवत कपोल ही,अधर भए कम्प देखि सरस‌ अरूणाई।
निदान प्यास करि अधर अधर धरि,देखि "प्यारी" अंग अंग रस पुलकाई।

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