क्यों न भये
क्यो न भये
हम क्यौ न भयै पक्छी।
काय न हमहौ पर पायौ,काय उडन ना चाह सकै।
तापै बैर पड्यौ जे जिय,बिनु पर उड्यौ जा संग फसै।
अरू बुरी बात जिन लगौ हिय,तिन मौल कौडि कौ दाम लगै।
हौ टेरत टेरत हार गयै,तिन भनक न अबहु कान पडै।
जी जरत मैरौ कहतौ अब हौ,कौई बिधि न अबहु प्राण धरू।
पर कहा करै लाचार हिय,प्यारी पीय बिनु कैसेहु मरू।
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