हे नाथ रमणा

हे नाथ रमणा च्यौ दी बिसारी।
साधन सधन तऊ कदिहु करै ना,निर् हेतुई तौ ली पुकारी।
भाव भगत भगति नाहि जानू,तबहु दई निजहु रज प्यारी।
अबहु भया का जई दूरि भाजै,काहै दशा तुम्हु ह्यौ बिगारी।
आन मिलौ प्यारै प्राणन प्राण, जेई बस औषध "प्यारी" बिमारी।

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