रीझै आपई अपनी ठकुराई।
रीझै आपई अपनी ठकुराई।
बालक देखिकै बिँब ज्यौ रीझैँ,खैले आपई अपनी परछाई।
सिँधु प्यास प्रति बिँदु के जैसी,तैसी प्यास मधुरता ईन छाई।
आपनौ मधुरता देखि करै अचरज,परै भूले निज की ठकुराई।
मधुरता जोरि रस सौ नाहि दूजी,"प्यारी" मधुरता इन उपमा नाही।
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