प्यारी प्रेम रस लोलुप

प्यारी प्रेम रस लोलुप नंदनंद ।
नित नब यत्न मिलन सुख हेरत ,जदपि मोहन आनंदकंद।
पुलकित होत गाबै  राधा राधा , देखि देखि मिलै आनंद ।
चितबत  रहें  प्यारी  मुख ऊपर , ज्यों चकोर निरेखे चंद ।
मुख माधुर्य रस पीबत दोउ , परस्पर बनि मधुप मकरन्द ।

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