लखी कनक कुमुदनि अलिन सु गुंजित।

लखी कनक कुमुदनि अलिन सु गुंजित। 
भ्रमित लखत डरपत छूवतई,नैन टीकै नाही परि परिहै फिसरित।
रस सौरभ देखत मतवारौ,बिनु पियै भए सार सौरभहु सुरभित।
लचक हिरत ललचावत अलिना,भरी नाज खरी करी अलिहु कुमुदित।
कहिए कौन कौनहु ढुरिहा,देखि "प्यारी" रस आप आपसहु लुंठित।

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