निकुँज पड़ी प्रिया प्रीतम

निकुंज पड़ी प्रिया प्रीतम की शैय्या ।
करत विहार थकित भये दोउ ,आबत परस्पर डारि गलबैय्या ।
पुष्प इत्र डारि बिछाई सखियन , मखमल  गद्दा गरम रजैय्या ।
एक सेज एकहि रजाई , एकम  एक  ह्वै दोउ पलक लगैय्या ।
माधुर्य स्वप्न देखो दोउ ,दोउन विलोकि विरहणी लेत बलैय्या ।

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