चुनत रमण निज कर पुष्पानी

चुनत रमण निज कर पुष्पाणि।
कर कुसुमनि धरै नैन धरै मौपे,घिर आई मौपेहु बैरन लजानि।
नाहि पलकनि गिरै खिरै दोऊ अधरा,भई जड भाँति हिरू ना हिरानी।
कहू कैसो कहा बीती उर "प्यारी",लिन्ही छबी जई पियही छिपानी।

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