"प्यारी" वास वृंदा विपिन को सहज जानिए नाही।

"प्यारी" वास वृंदा विपिन को सहज जानिए नाही।
लै शीश हथेली मोल लगै तऊ जानौ सस्तौ पाही।।1।।
तज वृंदा रज जो चले तव सम ना मंदमति कोय।
दृढ निश्चय कर आइए फिर जो कछु होय सो होय।।2।।
ब्रज मे बनि के मै रहू तरू कीर मयूर मृणाल।
या मिल रज मे रज बनू धारू धूरि रसिकन उर भाल।।3।।

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