नैनन को कहा दोष रमणा
नैनन को कहा दोष,रमणा.....नैनन को कहा दोष।
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इन छब ओझल करि च्यौ ऐसौ,कौन बात कौ रोष,रमणा....नैनन को कहा दोष।
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बिरह मेटन हित इन दए अंसुवन,दए उल्टोई बिरहा पोष,रमणा.....नैनन को कहा दोष।
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रखि सहज सम्हारी नैन छब तिहारी,याकौ मिलौ कैसो परितोष,रमणा....नैनन को कहा दोष।
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अंग अंग पीकै भरि हिय तिजोरी,काहै खाली कीजौ कोश,रमणा......नैनन को कहा दोष।
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गई छबीही जई बचै च्यौ प्राणन,"प्यारी" हरौ प्राणनहु बोझ,रमणा.....नैनन को कहा दोष।
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