तरणि कुमुद बैठे प्यारी पिय।
रहै मुख सम्मुख मिलै नैन दोउ,उठै जमुन भाँति नव तरंगनि हिय।
प्यारी भर कर डारै पिय ओरि,हसै मुस्काए पिय कछु ना कियै।
पुनि डारि प्यारी पुनि हैरे हसै,कर पकर खैच पिय अंक लियै।
लिपटै उर तै बहु खेल करै,"प्यारी" दोउ रंगीलै रंग खेल कियै।
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