करि मोहे सनाथ नाथ करि अपनी
करि मौहे सनाथ नाथ कर अपनी।
जग ढौढत कोउ अपनौ ना पाई,तऊ हित टहल लिन्ही मौहे रखनी।
बिनु गुण देखत लई अपनाए , लई मौहे चरण धरी पिय सजनी।
कुंज निकुंजनि संग लए घूमै,लिन्ही संगई मौहे निमृत रंग रंगनि।
रहै सदाई योई " प्यारी" संगै , रहे सुख सेवा हित सदाई संगनि।
Comments
Post a Comment